तेरबी की रात,( सत्य घटना ) भाग २


   मैं द अभिजीत पैरानॉर्मल एक्सपर्ट एंड इन्वेस्टिगेटर 
       अब तक आप ने पढ़ा जगन्नाथ किस तरह से हॉस्पिटल में भर्ती हो गए की पत्नी क्यों चुप बैठी थी 
          इस बात को जानने के लिए हमे साल 2015 जाना होगा  जब जगन्नाथ अपनी  बेटी की शादी को लेकर परेशान हो गए थे तब उन्हें किसी ने शिव जी के पूजा करने को विधि बताया ।।
जगरनाथ  ने अपनी पत्नी को आकर  सारी बात बात बताया।।
                                
                फिर दोनों कि अगले दिन से ही शिव को प्रसन्न करने पूजा करने लगे। लेकिन पूजन के कुछ नियम थे।  नियमानुसार ही  पूजा करना था। शिवाजी का  मंदिर उनके घर ब बस्सी से कुछ ही दूरी पर था । मेरे क्लाइंट जगन्नाथ और उनकी पत्नी दोनों साथ में पूजन करने लगे लेकिन एक दिन तेरबी की रात जब भी दोनों पूजन समाप्त कर लौट रहे थे तभी उनके सामने एक उनके सामने एक बहुत ही तेज प्रकाश उत्पन्न हुआ और उसे आकार ले लिया। वह कोई और नहीं (  शंखनी) नहीं थी। 
क्या होती हैं शंखनी ?????
क्या करती हैं। ?
क्या करती हैं।??
आज से पहले अनुभव कभी अनुमति जिंदगी में नहीं किया जैसे ही बहन के सामने आई मानो उनकी पैरों तले से जमीन सरक गई और एक बहुत ही जोरदार हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा ऐसा लगता है। उनके सामने बिजली गिर गई हो  सुखा जा रहा था मानो  कलेजा मुंह को आगया उन्हें क्या पता था  लोग जिसे पाने के लिए जप,तप, तपस्या करते हैं मैं उन्हें यूं ही मिल जाएगा शायद यह उनके कुछ कर्म ही थे जो उन्हें इतनी आसानी से इतनी बुरी शक्तियों के सामने आकर प्रकट हो गई

और सामने से एक बहुत ही मधुर आवाज आई जगन्नाथ और जगन्नाथ मैं तुम्हारे बारे में सब जानती हूं इतना सुनते ही  जगन्नाथ की दशा देखने लायक थी वह बोलना चाहते हुए भी  उनकी कुछ आवाज नहीं निकली लेकिन डरते डरते उन्होंने बोला आप कौन हैं उन्होंने अपना परिचय दिया और बोली मैं शकनी हूं मैं मैं यहां शिव मंदिर पर ही रहती हू। जब तुम रोज जाते हुए मंदिर से बाहर की ओर एक जो पीपल का वृक्ष है वह पर तुम दीप जलते हो न मैं इस पर रहती हूं और मैं तुम्हारी इस भक्ति से बहुत प्रसन्न हुई । कुछ कह नहीं पाए और चुपचाप वह दोनों  अपने घर आए। और इस बारे में एक दूसरे से चर्चा करने लगे फिर उन्होंने अपने गुरु जिन्होंने उन्हें यह पूजा करने के बारे में बताया था हमने इस बारे में पूछा तो उनकी तो मानो खुला का खुला रह गया और कहने लगी मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता तुम्हारी रक्षा भगवान ही करेंगे इतना कहकर वह चला गया जगन्नाथ बहुत ही हैरान-परेशान अपने कमरे में आकर एक तरफ कुर्सी पर बैठी है तभी फिर से वही आवाज आई प्यारी मधुर की आवाज जगन्नाथ बहुत देखा तो सामने मैं फिर से खड़ी थी इस बार जगन्नाथ ने अपना हृदय मजबूत करते हुए पूछ ही लिया क्यों आए हो और क्या चाहते हो ।

 शंखनी  बहुत ही मधुर आवाज तुम क्या दोगे मुझे । जगन्नाथ के पास उसका कोई जवाब नहीं था उसने कभी सोचा भी नहीं था ऐसा कुछ होगा लेकिन आप जगन्नाथ की जिंदगी पलटने वाली। दोनों के बीच में बहुतसमय बात हुई और दोनों के बीच में कुछ बातें नियम तय हुई। अब  जगन्नाथ जो भी कम सोचता है । बह उससे सोचते  ही पूरा हो जाता है।  तो ऐसा ऐसा क्या हुआ क्या नियम तय हुए थे उनके के बीच के जिन्हें जगन्नाथ  नहीं कर पाया और आज इस हालत अस्पताल  में है 
 जाने के लिए पढ़ते रहिए द अभिजीत पैरानॉर्मल एक्सपर्ट एंड इन्वेस्टिगेटर क्या आपके  आस पास भी कुछ ऐसा असामान्य जगह घटित  हो रहा है तो आप हमें संपर्क कर सकते हैं  abhijeet1004@gemali.com 
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 It's a true and real story some sociologic reasons  these names are change in the story. 😊











 
       

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