तेरबी की रात (एक सत्य घटना) भाग ३


 हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सब मैं उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी यह सत्य घटना पढ़ने में मजा आ रहा होगा। यह कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है इसका घटना में नाम ही काल्पनिक है। है जिन्हें बदल दिया गया है तो आईए जानते हैं आगे क्या नियम व शर्त तय हुए थे। जगन्नाथ और शंखनी के बीच में जगन्नाथ ने शंखिनी को अपने एक मित्र के रूप में स्वीकार कर लिया था और उनके बीच में है तय हुआ था कि 

*शंखिनी से बिना पूछे जगन्नाथ कहीं नहीं जाएगा !

*शंखनी से पहले भोजन नही करेगा। 

*उस  से बिना पूछे कहीं अकेले घूमने नहीं जाएगा!

*जहां भी जाएगा उसे साथ ले जाएगा! 

* मैं हर कार्य में पहले उसकी अनुमति लगा फिर वह कार्य करेगा

जब जगन्नाथ ने अपनी पत्नी को यह सब बताया तो वह माथा-पीट कर रह गई लेकिन अब कर भी क्या सकते थे और ना ही कुछ हो सकता था अब इसका परिणाम क्या होगा आईए जानते हैं 

अब

 ?????

लेकिन जगन्नाथ को क्या पता था कि मैं अज्ञानता बस भूल कर बैठा है उसने बिना किसी से पूछे और बिना किसी जानकारी के उसने सारे नियम व शर्तें मान ली इस कारण से वह अपनी पत्नी से भी दूर रहने लगा लेकिन एक बात अच्छी थी जो वह आई थी कि जगन्नाथ की बेटी का विवाह एक बहुत ही संपन्न घर में हुआ विवाह के बाद भी ठीक का जीवन भी बहुत खुश धन-धान्य से समृद्ध परिवर थ उनका समाज में मान सम्मान और एक रुतबा था। जगन्नाथ को जब भी मौका मिलता वह समाज के लिए तन मन धन से समर्पण का भाव रखता हुआ सबकी मदद करता था लेकिन एक दिन अचानक से ही। सुबह से टेलीफोन पर एक फोन आया जगन्नाथ कहां हो तुम आज तुम्हे में ऑफिस जल्दी आना है इतना कहते ही बॉस ने फोन रख दिया। आज जगन्नाथ को ऑफिस में प्रमोशन मिलने वाला था जगन्नाथ भी बहुत खुश था और खुशी-खुशी में  जगन्नाथ भी हावड़ा में बिना किसी को बता जल्दी से तैयार हुआ और ऑफिस के लिए निकल गया यही उसके जीवन की पहली और सबसे बड़ी भूल थी शंखनी  नएमइस बात से नाराज हो गई और आज जगन्नाथ हॉस्पिटल में भर्ती है और और ठीक 9 दिन बाद जगन्नाथ हमें और इस दुनिया को अलविदा कर देख लो के लिए चला जाता है लेकिन बातें ही नहीं रुकती देखा एक जगन्नाथ की बनाए हुए सर मान सम्मान रुपया सब धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है और उसका परिवार एक सामान्य से भी थी या यूं कहे की एक दयनीयवीहै जिंदगी जीने पर मजबूर हो जाता है जब यह कैसे यह कैसे मेरे पास आया तो हमने ऐसे इन्वेस्टिगेट किया और हमें यह सारी सच्चाई का पता चला जो आज मैं आप सबके सामने लेकर आया हूं हमने इस हमने इस समस्या से जगन्नाथ के परिवार को तो निकाल लिया लेकिन हर जगन्नाथ हमारे बीच में नहीं है इसलिए कहते हैं बिना विचार किए बिना हमें कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जब तक कि मैं उसका पता ना हो यह कहानी यहीं पर समाप्त हुई।।।

 और अधिक सच्ची घटनाओं कोई यूं ही जानने के लिए हमारे साथ बने रहिए आपका प्यारा दोस्त


द अभिजीत पैरानॉर्मल एक्सपर्ट एंड इन्वेस्टिगेटर

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 It's a true and real story some sociologic reasons  these names are change in the story. 😊











 
       



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